सिया की याद आई लखन मेरे भाई लिरिक्स - भजन (Siya Ki Yaad Aayi Lakhan Mere Bhai Lyrics)
सिया की याद आई,
लखन मेरे भाई,
हे भैया लखन,
ना होता सहन,
कहा है तुम्हारी भोजाई,
सिया की याद आयी,
लखन मेरे भाई।।
तर्ज – वफ़ा ना रास आई।
है लक्ष्मण बरसा बीत गई,
अब शुद्ध सरद ऋतु आयी है,
मैं बड़ा अभागा हूं अब तक,
सुध नहीं सिया की पाई है,
मुझे देके ये गम,
ऐसे दिए हैं सितम,
मेरी भी याद भुलाई,
सिया की याद आयी,
लखन मेरे भाई।।
कपिपति का मुझे भरोसा था,
वह भी तो मुझसे दूर हुआ,
माया की महा तरंगों में,
वचनों का बेड़ा चूर हुआ,
मुझे देके वचन,
ना किया है रहम,
सिया की याद आयी,
लखन मेरे भाई।।
सिया की याद आई,
लखन मेरे भाई,
हे भैया लखन,
ना होता सहन,
कहा है तुम्हारी भोजाई,
सिया की याद आयी,
लखन मेरे भाई।।
लेखक – शिवजीत शर्मा।
9802242932