रो रही पाप से धरती अवतार धार तू आजा - भजन (Ro Rahi Pap Se Dharti Avtar Dhar Tu Aaja Lyrics)
हे परमपिता परमेश्वर,
हरि आप जगत के राजा,
रो रही पाप से धरती,
अवतार धार तू आजा।।
पग पग पे मातम छाया,
दुष्टों का आतंक भारी,
तेरा धर्म फंसा संकट में,
हुआ हर कोई अत्याचारी,
लाचारी ये प्रजा सारी,
तू इस की धीर बंधाजा,
रो रहीं पाप से धरती,
अवतार धार तू आजा।।
गुरुओं का आदर छुट गया,
ओर छुट गई प्रीत पुरानी,
मां बाप मरें यहां भूखे,
कलयुग की यही कहानी,
भाईयो में खेचातानी,
आ फेर से प्रेम बढाजा,
रो रहीं पाप से धरती,
अवतार धार तू आजा।।
ना रही कुलवंता नारी,
आदर सत्कार भूलगी,
यहां बेटी मरें कोख में,
घर घर में लाश झुलगी,
मेरी सुन के सांस फुलगी,
इस दर्द को नाथ मिटाजा,
रो रहीं पाप से धरती,
अवतार धार तू आजा।।
युगों युगों से स्वामी,
तुने अपना सत दिखलाया,
कितने तुम्हें नाम गिनाऊं,
जीन कारण तू चला आया,
कहें सुरेन्द्र सिंह तेरी माया अब,
इस को दूर हटा जा,
रो रहीं पाप से धरती,
अवतार धार तू आजा।।
हे परमपिता परमेश्वर,
हरि आप जगत के राजा,
रो रही पाप से धरती,
अवतार धार तू आजा।।
गायक – सुरेन्द्र सिंह निठौरा।
9999641853